शासकीय प्राथमिक शाला डिघवार में आज भी जो भोजन बनाने का जगह है वह कुछ इस प्रकार झुग्गी में है और हम कहने को डिजिटल भारत में रहते हैं और तरक्की भी कर रहे हैं और आए दिन दिखाया जाता कि हम चांद से वापस आ गए हैं हम टेक्नोलॉजी में अब किसी से कम नहीं है हमारे पास ना ही किसी सुपर पावर देश से अगर लड़ाई करनी हो तो हथियारों की भी कमी नहीं है और हम आज घर बैठे दुनिया के किसी कोने में बात कर सकते हैं लेकिन कुछ सरकारी व्यवस्थाएं ऐसी हैं जमीनी स्तर की बात की जाए तो शिक्षा विभाग की आला अधिकारी सब ध्यान ही न दिए हो या तो उन्हें अपने सुख और शोहरत के अलावा समय ना मिलता हो कि थोड़ा सा कुछ विद्यालयों की भोजन बनाने की व्यवस्था को देख लें सिर्फ कागजों पर विकास ग्राम पंचायत में देखने को मिलता है लेकिन शिक्षा विभाग भी उनमें से एक है
शायद खबर पढ़ने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी नींद से जाग जाएं तो इस स्कूल की भोजन बनाने की जो जगह है उसमें कुछ बदलाव हो सकता है और बदलाव होने के बाद ही समझ जाएगा की नींद से जाग गए हैं।